मार्गदर्शिकाएँ · डर · साहस · आत्म-मूल्य
भगवद्गीता 2.3
आप उससे कहीं ज़्यादा मज़बूत हैं जितना यह पल आपको बता रहा है। जब आप तैयार हों, आप उठ सकते हैं।
क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप॥
klaibyaṁ mā sma gamaḥ pārtha naitat tvayy upapadyate
kṣudraṁ hṛdaya-daurbalyaṁ tyaktvottiṣṭha paran-tapa
हिन्दी भावार्थ
हे पार्थ, इस कायरता को मत अपनाओ, यह तुम्हें शोभा नहीं देती। हृदय की इस तुच्छ दुर्बलता को त्यागकर उठ खड़े हो।
अंग्रेज़ी अनुवाद · English translation
Do not yield to this weakness, Arjuna; it does not suit you. Cast off this small faintness of heart and rise, O scorcher of foes.
सरल शब्दों में व्याख्या
आप उससे कहीं ज़्यादा मज़बूत हैं जितना यह पल आपको बता रहा है। जब आप तैयार हों, आप उठ सकते हैं।
संदर्भ
हताश अर्जुन से श्रीकृष्ण के पहले शब्द उन्हें अपनी शक्ति याद दिलाने का आह्वान हैं — दृढ़, पर एक ऐसे मित्र के, जो उन पर विश्वास करता है।
यह कब मदद कर सकता है
जब आपको हिम्मत चाहिए, या जब आत्म-संदेह आपको अपने बारे में सच से छोटी कहानी सुना रहा हो।
चिंतन प्रश्न
अगर आप अपनी शक्ति पर थोड़ा और भरोसा करते, तो आज क्या करते?
एक छोटा अभ्यास
खड़े होइए, कंधे पीछे कीजिए, और अपने अगले कठिन काम से पहले एक गहरी साँस लीजिए।
इस श्लोक पर चिंतन कीजिए, अपने विचार सहेजिए या इसे कार्ड के रूप में साझा कीजिए।
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