मार्गदर्शिकाएँ · साहस · उद्देश्य · विकास
भगवद्गीता 3.8
जब सब कुछ अटका लगे, तो अगला छोटा कदम अक्सर रास्ता बनाता है।
नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः॥
niyataṁ kuru karma tvaṁ karma jyāyo hy akarmaṇaḥ
śarīra-yātrāpi ca te na prasiddhyed akarmaṇaḥ
हिन्दी भावार्थ
अपना नियत कर्म करो, क्योंकि कर्म न करने से कर्म करना श्रेष्ठ है। बिना कर्म के तो शरीर का निर्वाह भी संभव नहीं है।
अंग्रेज़ी अनुवाद · English translation
Do the work that is yours to do, for action is better than inaction. Even the simple maintenance of your body would not be possible without action.
सरल शब्दों में व्याख्या
जब सब कुछ अटका लगे, तो अगला छोटा कदम अक्सर रास्ता बनाता है।
संदर्भ
अर्जुन सोचते हैं कि क्या कर्म से हट जाना बेहतर होगा। श्रीकृष्ण कोमलता से कहते हैं कि जीवन स्वयं गति है।
यह कब मदद कर सकता है
जब आप अटका हुआ, बेमन या बहुत सारे विकल्पों से ठिठका हुआ महसूस करें।
चिंतन प्रश्न
आप अगला सबसे छोटा कदम क्या उठा सकते हैं?
एक छोटा अभ्यास
दस मिनट का टाइमर लगाइए और सिर्फ़ एक काम पर लगिए। घंटी बजे तो चाहें तो रुक जाइए।
इस श्लोक पर चिंतन कीजिए, अपने विचार सहेजिए या इसे कार्ड के रूप में साझा कीजिए।
गीता रिफ्लेक्शन में खोलें